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सीट का समीकरण: 3 चुनाव, तीन चेहरे और 3 अलग पार्टियों ने मारा मैदान; ऐसा है शामली विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
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Latest And Breaking Hindi News Headlines, News In Hindi | अमर उजाला हिंदी न्यूज़ | - Amar Ujala
विज्ञापनविज्ञापनविज्ञापनउत्तर प्रदेश के 75 जिलों में से एक जिला है शामली। इस जिले के अंतर्गत तीन तहसील, पांच ब्लॉक और 322 गांव आते हैं। इस जिले की शामली विधानसभा सीट 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई।शामली विधानसभा सीट पर पहली बार चुनाव 2012 में हुए थे। राजनीतिक रूप से यह क्षेत्र पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट-मुस्लिम समीकरणों, गन्ना किसानों के मुद्दों और एंटी-इन्कंबेंसी यानी सत्ता विरोधी लहर के अनूठे इतिहास के लिए जाना जाता है।2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार पंकज कुमार मलिक ने जीत दर्ज की थी। जाट समुदाय से आने वाले पंकज को कुल 53,947 वोट मिले थे। कांग्रेस ने यह चुनाव राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के साथ मिलकर लड़ा था। वहीं, समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार वीरेंद्र सिंह दूसरे स्थान पर रहे थे, जिन्हें कुल 50,206 वोट हासिल हुए थे। यानी पंकज मलिक ने यह चुनाव महज 3,741 वोटों के करीबी अंतर से जीता था। इस सीट पर तब बसपा प्रत्याशी को 45,597 वोट मिले थे, जबकि भाजपा उम्मीदवार महज 9,105 वोट ही हासिल कर पाए।एक बार फिर इस सीट पर जाट समुदाय के ही उम्मीदवार को जीत मिली। भाजपा के तेजेंद्र निर्वाल को 2017 में इस सीट पर 70,085 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस के पंकज कुमार मलिक महज 40,365 वोट ही हासिल कर सके। यानी उनकी करीब 30 हजार वोटों से हार हुई। पंकज की हार की एक बड़ी वजह कांग्रेस और रालोद का गठबंधन टूटना रहा, जिसके चलते रालोद ने अपना अलग उम्मीदवार उतारा। चुनाव में रालोद के बिजेंद्र सिंह को 33,551 वोट मिले, जो कि कांग्रेस की हार का बड़ा कारण बनी। इसके अलावा निर्दलीय मनीष कुमार को 31,824 वोट और बसपा के मोहम्मद इस्लाम को 17,114 वोट मिले।2022 के चुनाव से ठीक पहले हुए तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसान आंदोलन ने यहां के राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल दिए। जाट और मुस्लिम मतदाताओं के बड़े धड़े एकजुट हो गए। नतीजतन राष्ट्रीय लोक दल के प्रत्याशी प्रसन्न चौधरी ने 48.86% वोट हासिल किए। रालोद ने यह चुनाव सपा के साथ गठबंधन में लड़ा था। चौधरी ने इस चुनाव में भाजपा के तेजेंद्र निर्वाल को कड़े मुकाबले में मात दी और विधायक बने। जहां प्रसन्न को 1,03,070 वोट मिले। वहीं, भाजपा को 95,963 वोट हासिल हुए।इस लिहाज से देखा जाए तो इस सीट की सबसे दिलचस्प बात यही है कि जब से इसका गठन हुआ तब से यहां की जनता ने कभी भी किसी मौजूदा विधायक को दोबारा नहीं चुना है। हर पांच साल बाद यहां की जनता ने विधायक और राजनीतिक दल दोनों को बदल दिया है।