विज्ञापनविज्ञापनविज्ञापनआठ वर्ष से पहले स्तनों का बढ़नालड़कों के शरीर व जननांग पर बालों का जल्दी आनापीजीआई के पीडियाट्रिक एंडोक्रायनोलॉजी क्लीनिक की चिकित्सक प्रो. अंजलि वर्मा ने बताया कि क्लीनिक में हर महीने करीब छह नए बच्चे पहुंच रहे हैं। इनमें लड़कियों की संख्या ज्यादा है। फिलहाल पीजीआई में करीब 40 बच्चे हर महीने इलाज के लिए लीयूपरोलाइड इंजेक्शन लेने पहुंच रहे हैं। इनमें लड़कों की संख्या केवल सात है। हरियाणा के सभी जिलों के अलावा राजस्थान व उत्तर प्रदेश से भी बच्चे आ रहे हैं। साल 2019 में ऐसे मामलों की संख्या महज दो से तीन थी। अब जागरूकता बढ़ने की वजह से केस ज्यादा संख्या में सामने आने लगे हैं।डॉ. अंजलि वर्मा ने बताया कि इस बीमारी में कम उम्र में ही दिमाग से सामान्य के मुकाबले ज्यादा हार्मोन निकलने लगते हैं। इनको रोकने के लिए बच्चों को हर महीने लीयूपरोलाइड इंजेक्शन लगाया जाता है। कुछ वर्षों तक हर महीने यह टीका लगाने के बाद 11 से 12 साल तक आते-आते इंजेक्शन लगाना बंद कर दिया जाता है।लड़कियों में समय से पहले यौवन का मुख्य कारण मोटापा है, जंक फूड का सेवन, स्क्रीन टाइम बढ़ने, व्यायाम की कमी, ब्रेन ट्यूमर व उर्वरक युक्त खान-पान भी इसके बड़े कारणों में हैं। ऐसे में रोजाना व्यायाम, स्क्रीन टाइम कम व जंक फूड से दूरी ही सावधानी है।अभिभावकों के देरी से अस्पताल पहुंचने के कारण बच्चों की लंबाई पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है। उनकी लंबाई कम रह जाती है। अगर समय पर डॉक्टर के पास आ जाएं तो इसका सटीक समाधान संभव है।पहले केस में एक चार साल की मासूम बच्ची को पीरियड की ब्लीडिंग होने पर पीजीआई लाया गया। जांच में पता चला कि उसके हार्मोन सामान्य से काफी बढ़े हुए थे। अब हर महीने टीके के जरिए उसका इलाज चल रहा है।दूसरे केस में एक पांच साल का लड़का अस्पताल पहुंचा, जो अपनी उम्र के बच्चों से काफी बड़ा दिखता था। उसके चेहरे पर बड़ों की तरह बहुत ज्यादा मुहांसे हो गए व प्राइवेट पार्ट पर भी बाल उग आए थे।