{"_id":"6a77411b7c95b89d43031de0","slug":"khabaron-ke-khiladi-bypoll-results-from-bankipur-to-datia-analysis-bjp-congress-issue-and-gen-z-protest-news-2026-08-08","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Khabaron Ke Khiladi: बांकीपुर-दतिया के नतीजे किसके लिए सबक, किसे दे गए उम्मीद; विश्लेषकों ने बताई अंदर की बात","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}विज्ञापनपीयूष पंत: बांकीपुर के चुनाव ने ये दिखाया है कि चाहे भाजपा को वोट हो या राजद का वोट दोनों पीके की तरफ शिफ्ट हुआ है। मुझे लगता है कि पीके ने अपनी पहचान और अपनी प्रेजेन्स को उन्होंने दो साल पहले जो यात्रा की उससे बिहार में बना ली थी। उन्होंने जमीनी स्तर पर काम किया। नीतीश के जाने के बाद बिहार में जो गैप आया है, प्रशांत किशोर उसे भरने की कोशिश करेंगे। विज्ञापन बीते हफ्ते तीन राज्यों की तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे आए। बांकीपुर में प्रशांत किशोर की जीत ने सुर्खियां बटोरीं। वहीं, राष्ट्रीय अध्यक्ष की सीट पर 31 साल बाद मिली भाजपा की हार ज्यादा चर्चा में है। वहीं, दतिया विधानसभा नतीजों के बाद जीतने और हारने वाले दोनों पक्ष की ओर से भीतरघात की चर्चा है। कांग्रेस की जीत और भाजपा की हार से ज्यादा यहां चर्चा नरोत्तम मिश्र की हो रही है। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इन विधानसभा उपचुनाव के नतीजों पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, पीयूष पंत, पूर्णिमा त्रिपाठी, राकेश शुक्ल और मीहिर रंजन मौजूद रहे।मिहिर रंजन: इस उपचुनाव के नतीजों का भविष्य में बड़ा असर हो सकता है। कई बार कुछ उपचुनाव सिर्फ एक सीट या सरकार के हिसाब से नहीं जनता की पल्स के हिसाब से देखना चाहिए। बिहार में जिस सीट पर चुनाव हुआ वो भाजपा का गढ़ है। इसका मतलब या तो जनता को लेकर आपका एसेसमेंट गलत हो गया या आप अति आत्मविश्वास की वजह से हार मिली। प्रशांत किशोर की जीत भाजपा के लिए बहुत अलार्मिंग कंसर्न है। ये वक्त रहते चेतन का बहुत अच्छा मौका है।पूर्णिमा त्रिपाठी: भाजपा को शायद इसका अंदाज नहीं था। जनता ऐसा समय-समय पर झटका राजनीतिक दलों को देती रहती है। प्रशांत किशोर की जीत के बाद भाजपा को ये सोचना होगा कि जो सीट उन्होंने नीतीश-लालू के साथ आने के बाद जीत ली थी उसे वो कैसे हार गई? प्रशांत किशोर शिक्षा और बेरोजगारी का मुद्दा पिछले चुनाव से ही लेकर चल रहे थे। लोगों को लगा कि ये उम्मीदवार मुद्दों को बात कर रहा है। इस बार लोगों ने पार्टी लाइन की जगह मुद्दे को चुना है।