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Jantar Mantar Protest: आखिर किसके आदेश पर चली तीन पैलेट गन, दिल्ली पुलिस और आरएएफ आमने सामने; भारी उलझन
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Latest And Breaking Hindi News Headlines, News In Hindi | अमर उजाला हिंदी न्यूज़ | - Amar Ujala
20 जुलाई को जंतर-मंतर और संसद मार्ग इलाके में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और विभिन्न छात्र संगठनों के चलो संसद मार्च के दौरान कुल पैलेट गन से पांच गोलियां चलीं थीं। नई दिल्ली जिले के संसद मार्ग थाने में दर्ज जीडी में कहा गया कि जोन-एक में पैलेट गन से दो गोलियां चलीं थीं। अब सवाल ये है कि आखिर पैलेट गन से तीन और गोलियां किस जोन में चली थीं और किस डीसीपी ने चलाने के आदेश दिए थे। पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर दिल्ली पुलिस व आरएएफ अब आमने-सामने है और एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ रही हैं।विज्ञापनविज्ञापनविज्ञापनकुछ दिन पहले आरएएफ के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा था कि उनके जवानों ने पैलेट गन का इस्तेमाल किया। आरएएफ के जवान ने संसद मार्ग थाने में कराई जीडी इंट्री में कहा है कि दिल्ली पुलिस के जोन-एक में हुई इस घटना के दौरान दो पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, आरएएफ का दावा है कि कुल पांच गोलियां चलाई गईं। अब ये जांचा जा रहा कि किस जोन में इस गन का इस्तेमाल कर तीन गोलियां और चलाई गई थीं।आखिर कौन वह डीसीपी हैं, जिनके आदेश के बाद इस गन का इस्तेमाल हुआ। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान पूरी नई दिल्ली को 15 जोन में बांटा था। हालांकि ये बीच-बीच में जोन का क्षेत्रफल व उनके डीसीपी बदलते रहे थे। फिलहाल, विभिन्न सुरक्षा एजेंसियां इस मामले में एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ने की कोशिश कर रही हैं। दिल्ली पुलिस, आरएएफ और अन्य संबंधित एजेंसियां घटना के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रही हैं। इससे जांच प्रभावित हो सकती है। दिल्ली पुलिस के विशेष पुलिस आयुक्त (कानून व्यवस्था) देवेश चंद श्रीवास्तव पहले ही कह चुके हैं कि दिल्ली पुलिस के पास पैलेट गन नहीं है।दिल्ली पुलिस के अधिकारी ने बताया कि जब भी कहीं अर्द्धसैनिक बलों की टुड़कियां आती हैं तो वह एक कागज पर, जो कि कोरा होता है, पर संबंधित वरिष्ठ अधिकारी के हस्ताक्षर कराती हैं। इसके बाद वह फोर्स की संख्या, तैनाती स्थल व अन्य जानकारी खुद भरती हैं। ऐसा ही संसद मार्ग थाने में दर्ज जीडी इंट्री दर्ज कराते समय हुआ है। जीडी इंट्री दर्ज गन के इस्तेमाल होन के दो दिन बाद दर्ज कराई गई है।जंतर मंतर पर प्रयोग की गई पैलेट गन पर एक नया घमासान शुरू है। सूत्रों की मानें तो इससे जुड़ी जीडी एंट्री को लीक कराकर पूरा ठीकरा दिल्ली पुलिस पर फोड़ने की कवायद को अंजाम दिया है। सूत्रों ने कहा कि जिस अधिकारी पर यह आरोप लगाया जा रहा उसके पास इससे जुड़ा प्रमाण मौजूद है कि उसने पैलेट गन के इस्तेमाल की कभी इजाजत ही नहीं दी थी। अब सवाल है कि 20 जुलाई की घटना की जीडी एंट्री दो दिन बाद दर्ज कराने के पीछे कोई सोची समझी चाल तो नहीं थी?
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार पैलेट गन प्रयोग करने का फैसला आरएएफ के एक अधिकारी ने खुद लिया था और अब बवाल मच रहा है तो खुद को बचाने के लिए दिल्ली पुलिस को बदनाम किया जा रहा है।आरएएफ/सीआरएएफ का एक अधिकारिक पत्र बुधवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस पत्र में कहा गया है कि गार्द को नई दिल्ली जिले के डीसीपी सचिन शर्मा को उपलब्ध कराया जाता है। उनकी ओर से निर्देश हैं कि 20 जुलाई को शाम पांच बजे भीड़ को तीतर-बितर करने के लिए आंसू गैस, लाठीचार्ज व गन का इस्तेमाल कर गिरफ्तार या नजरबंद किया जाए। जबकि प्रदर्शन व हंगामा सुबह ही हो गया था।