1 of 14 kidnapping and murder - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्सखबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें यह खबर एप पर पढ़ें यावेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें संक्षिप्त विज्ञापन देखें विज्ञापन लोड हो रहा है अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो लॉगिन करेंपरिवार के मुखिया लक्ष्मी नारायण वर्मा और उनकी पत्नी द्रौपदी देवी के लिए यह सदमा असहनीय है। लक्ष्मी नारायण के पांच बेटे और तीन बेटियां हैं। सबसे बड़े बेटे त्रिभुवन वर्मा भी खजनी में कारोबार करते हैं। दूसरे नंबर के बेटे हनुमान वर्मा और सबसे छोटे बेटे उमाशंकर खजनी में सराफा कारोबार संभालते है। जबकि तीसरे नंबर के बेटे द्वारिका वर्मा एम्स में डॉक्टर हैं। उनसे छोटे गौरीशंकर वर्मा की घंटाघर में दुकान है। गोरखपुर के खजनी कस्बे के प्रतिष्ठित सराफा कारोबारी लक्ष्मी नारायण वर्मा के बेटे हनुमान सदमे में हैं। पहले पत्नी की मौत ने उन्हें तोड़ दिया था अब बेटे वैभव के कत्ल से खुशियां तबाह हो गई हैं। वहीं दादा और दादी की आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहा है। वे सबसे दुलारे पौत्र वैभव के जाने का गम भुला नहीं पा रहे हैं। जिस आंगन में कुछ दिन पहले बहू की चिता की राख ठंडी हुई थी, वहीं अब मासूम की अर्थी उठने से तीन पीढ़ियों का दर्द एक साथ छलक पड़ा।2 of 14 रोते बिलखते परिजन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसीबड़ा संयुक्त परिवार होने के कारण घर में हमेशा चहल-पहल रहती थी लेकिन अब उसी घर में चीख पुकार मची हुई है। करीब एक महीने पहले हनुमान की पत्नी श्वेता के निधन के बाद पूरा परिवार उनके तीनों बच्चों को संभालने में जुटा था।3 of 14 रोते बिलखते परिजन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसीसबसे छोटा होने के कारण वैभव दादा-दादी की आंखों का तारा था। द्रौपदी उसे पलभर भी अपनी नजरों से दूर नहीं होने देती थीं। दादा लक्ष्मी नारायण अक्सर उसे दुकान तक साथ ले जाते थे। पिता हनुमान भी बेटे की मासूम मुस्कान में पत्नी के बिछड़ने का दर्द भुलाने का प्रयास कर रहे थे।विज्ञापन विज्ञापन4 of 14 रोते बिलखते परिजन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसीवैभव की खिलखिलाहट संयुक्त परिवार की थी पहचानवैभव की खिलखिलाहट संयुक्त परिवार की पहचान थी। स्कूल से लौटकर वह कभी साइकिल चलाता, कभी अपने भाइयों और दोस्तों के साथ खेलता था। कभी दादा-दादी के कमरे में जाकर उनसे बातें करता तो उसकी शरारतों पर पूरा परिवार मुस्कुराता था। किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि रोज की तरह खेलने के लिए निकला यह बच्चा फिर कभी घर नहीं लौटेगा।विज्ञापन5 of 14 मासूम वैभव की फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी