विज्ञापनविज्ञापन#WATCH | Baramati, Maharashtra | Kiran Gujar, Member of Vidya Prathisthan and close associate of Pawar family, says, "Today, immersion of ashes of Ajit Pawar has done at Sangam here...It was 'Dada's' last wish that this (merger of two factions of NCP) should happen. All should be… pic.twitter.com/s9oyqeGtqW — ANI (@ANI) January 30, 2026बारामती में न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए विद्या प्रतिष्ठान के सदस्य और पवार परिवार के करीबी किरण गुजर ने कहा, "आज यहां अजित पवार की अस्थियों का विसर्जन किया गया। 'दादा' की आखिरी इच्छा थी कि एनसीपी के दोनों गुटों का विलय हो। सभी को एकजुट होना चाहिए। इस बारे में पूरे परिवार में बात हो रही थी। उनसे मेरी आखिरी फोन कॉल में उन्होंने मुझसे चुनाव से जुड़े कुछ कागजात मांगे थे।'दिवंगत अजित पवार के करीबी किरण गुजर ने दावा किया कि वो राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों गुटों के विलय के लिए उत्सुक थे, और यह जल्द ही होने वाला था। दिग्गज नेता के निधन के दो दिन बाद उनके किरण गुजर ने बताया कि उनसे यह बात खुद अजित पवार ने साझा की थी।1980 के दशक के मध्य में राजनीति में आने से पहले से ही किरण गुजर अजित पवार से जुड़े हुए थे। वो दिवंगत नेता के करीबी सहयोगी और विश्वसनीय सहयोगी थे। अब किरण गुजर ने गुरुवार (29 जनवरी) को न्यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कहा कि अजित पवार ने बुधवार (28 जनवरी) को विमान दुर्घटना से सिर्फ पांच दिन पहले ही उन्हें इस बारे में बताया था।गुजर ने आगे कहा कि वह दोनों गुटों को मिलाने के लिए सौ प्रतिशत उत्सुक थे। उन्होंने मुझे पांच दिन पहले बताया था कि पूरी प्रक्रिया पूरी हो गई है और अगले कुछ दिनों में विलय होने वाला है। बता दें कि हाल के नगर निगम चुनावों के दौरान जिसमें दोनों गुटों ने गठबंधन में चुनाव लड़ा था। अजित पवार ने कुछ चुनिंदा पत्रकारों से यह भी कहा था कि वह अपनी पार्टी का NCP (SP) में विलय करना चाहते हैं।पुणे और पिंपरी चिंचवड़ में 15 जनवरी को हुए नगर निगम चुनावों में एक साथ चुनाव लड़ने के बाद दोनों गुटों ने अगले महीने होने वाले जिला परिषद चुनावों के लिए भी गठबंधन जारी रखने का फैसला किया था। इतना ही नहीं गुजर ने दाने के साथ कहा कि अजित पवार के पास विलय और एकजुट एनसीपी के भविष्य के लिए एक रोडमैप तैयार था।यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने इस मुद्दे पर शरद पवार से बात की थी, जिस पर गुजर ने कहा, 'पवार साहब, सुप्रिया ताई (सुप्रिया सुले) और अन्य नेताओं के साथ सकारात्मक बातचीत चल रही थी और संकेत थे कि वरिष्ठ पवार इस कदम का समर्थन करेंगे।'उन्होंने कहा, 'कई सकारात्मक चीजें होने वाली थीं, लेकिन यह त्रासदी हुई और अजीत 'दादा' को हमसे छीन लिया। अब उनकी मृत्यु के बाद यह और भी जरूरी हो गया है कि दोनों गुट एक साथ आएं और बारामती और राज्य की बेहतरी के लिए काम करें।' गुजर, जो 40 से अधिक वर्षों से पवार परिवार से जुड़े हुए हैं, अजित पवार के विभिन्न राजनीतिक चरणों में उनके साथ रहे और उन्हें उनका करीबी विश्वासपात्र माना जाता था।अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए गुजर ने कहा कि 1981 में छत्रपति सहकारी चीनी मिल का चुनाव जीतने के बाद अजित पवार को राजनीति में आने के लिए राजी किया गया था। उन्होंने कहा, 'शुरुआत में वह हिचकिचा रहे थे और परिवार और खेती पर ध्यान देना चाहते थे। हालांकि, 1980 के दशक के आखिर में जब पवार साहब (शरद पवार) मुख्यमंत्री बने, तो बारामती में युवा नेतृत्व की जरूरत थी, और दादा ने वह भूमिका निभाई।'गुजर ने आगे कहा कि बारामती इलाके का विकास जारी रहेगा, लेकिन अजित दादा जैसा नेता दोबारा नहीं आएगा।