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Comment on दलित साहित्य की कसौटी पर बच्चा लाल उन्मेष की कविताएं by मनोज कुमार यादव
['Kanwal Bharti क वल भ रत', 'क वल भ रत']
Comments for Forward Press
आंबेडकर ने संविधान में आरक्षण की व्यवस्था न कराई होती, तो जो थोड़े से दलितों को आज शिक्षा और नौकरियों में प्रतिनिधित्व मिला है, वह भी नहीं मिलता। अगर भारत का कोई समाज इक्कीसवीं सदी में भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है और जिल्लत-भरी जिंदगी जीने के लिए मजबूर है, तो क्या यह माना जाएगा कि वह देश का नागरिक है और तरक्की कर रहा है?