इसमें दो राय नहीं कि अगर कांग्रेस में बहुजनों की वाजिब हिस्सेदारी दी जाय और महिला आरक्षण जिसमें बहुजन महिलाओं के लिए अलग से कोटा हो और इसको चुनावी एजेंडा बनाया तो उसका सामाजिक दायरा बढ़ जाएगा। और अगर कांग्रेस सामाजिक न्याय के इन सवालों के साथ लेकर आगे बढ़ती है तो उसकी राह में बहुत सारे कांटे भी बिछाए जाएंगे। वर्चस्ववादीवादी मीडिया सबसे पहले आगे आएगा और कांग्रेस से यह सवाल करेगा कि किस आधार पर उसने कोटा देने का फ़ैसला किया है। वह देश को जातिवाद में धकेलने और सवर्णों के साथ अन्याय करने का भी आरोप कांग्रेस के ऊपर लगाएगा। मीडिया के इस मुहिम में पर्दे के पीछे सारी जातिवादी और पूंजीवादी ताकतें रहेंगी। इसलिए कांग्रेस को अभी से तैयारी करने की ज़रूरत है। अगर कांग्रेस ने जातीय जनगणना का समर्थन अभी से करना शुरू कर दिया और इसको लेकर जनता के बीच में चली गई तो वह मीडिया के आरोपों का जवाब देने में एक…