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Comment on दलित-मुक्ति में हिंदी नवजागरण काल की पत्रकारिता और भूमिका by omprakash kashyap
['Kanwal Bharti क वल भ रत', 'क वल भ रत']
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हिंदी में महावीर प्रसाद द्विवेदी को नवजागरण का अग्रदूत कहा जाता है और ‘सरस्वती’ में हीरा डोम की कविता को प्रमाण माना जाता है। लेकिन, वस्तुतः यह भ्रामक है। जिस धार्मिक और सामाजिक सुधार के अर्थ में नवजागरण को लिया जाता है, उस अर्थ में नवजागरण की प्रवृत्तियां न द्विवेदी युगीन साहित्य में मिलती हैं और न उनकी ‘सरस्वती’ में। साहित्य का यही समूचा युग मूलतः हिंदुत्व के पुनरुत्थान का युग था। हिंदी के इस कालखंड में जहां महावीर प्रसाद द्विवेदी नारी को, निपट और नीच मान कर ‘द्रौपदी-वचन बाणावली’, मैथलीशरण गुप्त ‘व्यास-स्तवन’ और हिंदुत्व का गुणगान तथा जहां, अन्य विष्णु भगवान का वामनावतार जैसी कविताएं लिख रहे थे, वहीं दलित नवजागरण के कवि ईश्वर पर प्रश्न चिन्ह लगा रहे थे और विष्णु के अवतारों को कटघरे में खड़ा कर रहे थे। यह वह नवजागरण था, जो दलितों द्वारा किया जा रहा था। स्वामी अछूतानंद का आदि हिंदू आंदोलन…