समाजशास्त्रीय अध्ययन के लिहाज से इतिहास एक महत्वपूर्ण विषय है। इतिहास हमें घटनाओं के बारे में बताता है और हम अलग-अलग कड़ियों को जोड़कर देखते हैं तो वर्तमान के संदर्भ में आकलन कर पाते हैं। इसके आधार पर हम भविष्य की थाह भी लगाते हैं। इस आधार पर हम यदि द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाये जाने की घटना पर मनन करें तो हमें निश्चित रूप से 1848 का वह मंजर याद आएगा जब एक महिला अपने पति के साथ मिलकर लड़कियों के लिए स्कूल खोल रही थी। ब्राह्मणवादी वर्चस्व के घ्वजवाहक तब उसका हर मोड़ पर विरोध कर रहे थे। लेकिन वह महिला जानती थीं कि जो लौ वह जलाने की कोशिशें कर रही हैं, एकदिन उसकी रोशनी सर्वत्र फैलेगी। और यही हुआ है। करीब 174 साल के बाद इस देश के संवैधानिक शीर्ष पद पर वंचित समुदाय की महिला आसीन होंगी। दरअसल, द्रौपदी मुर्मू का अपना जीवन भी प्रेरणादायक रहा है। क्लर्क की नौकरी करने के…