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भू-राजनीतिक तनाव से शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 388 अंक टूटा
['Indian Awaaz']
The Indian Awaaz
Last Updated on August 11, 2026 8:21 pm by INDIAN AWAAZBY Our Business Correspondentकच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और अमेरिका-ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के कारण मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार दबाव में रहा। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने भी निवेशकों के रुख को प्रभावित किया। ब्रेंट क्रूड के 90 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने से भारत के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों के मुनाफे पर संभावित दबाव को लेकर चिंता बढ़ी।कारोबार के दौरान बिकवाली का दबाव खासकर एफएमसीजी और मेटल शेयरों में देखा गया, जबकि फार्मा और हेल्थकेयर कंपनियों के शेयरों में चुनिंदा खरीदारी रही। इस दबाव के चलते निफ्टी 50 24,500 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स में करीब 400 अंकों की गिरावट दर्ज की गई।एसएंडपी बीएसई सेंसेक्स 388.19 अंक यानी 0.49 प्रतिशत गिरकर 78,154.25 अंक पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी 50 में 112.10 अंक यानी 0.46 प्रतिशत की गिरावट रही और यह 24,471.70 अंक पर बंद हुआ।बड़ी कंपनियों के शेयरों ने बाजार पर डाला दबावबाजार में गिरावट के दौरान कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। महिंद्रा एंड महिंद्रा 1.62 प्रतिशत, भारती एयरटेल 1.43 प्रतिशत और एक्सिस बैंक 1.40 प्रतिशत नीचे रहे। ये शेयर निफ्टी के प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में शामिल रहे।एफएमसीजी और मेटल शेयरों में कमजोरी ने भी प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बढ़ाया। हालांकि, व्यापक बाजार में गिरावट अपेक्षाकृत सीमित रही। बीएसई 150 मिडकैप इंडेक्स लगभग सपाट बंद हुआ, जबकि बीएसई 250 स्मॉलकैप इंडेक्स 0.24 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ।बाजार की चौड़ाई यानी मार्केट ब्रेड्थ हालांकि नकारात्मक रही। बीएसई पर कुल 2,033 शेयर बढ़त में और 2,279 शेयर गिरावट में बंद हुए, जबकि 209 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।इस बीच, बाजार में निकट अवधि की अस्थिरता को मापने वाला इंडिया VIX 3.73 प्रतिशत गिरकर 11.79 पर आ गया। इसका अर्थ है कि प्रमुख सूचकांकों में गिरावट के बावजूद निकट अवधि में बाजार की अपेक्षित अस्थिरता में कमी आई।कच्चा तेल बना बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंतामंगलवार के कारोबार में कच्चे तेल की कीमतें निवेशकों के लिए प्रमुख चिंता का विषय बनी रहीं। ब्रेंट क्रूड के अक्टूबर 2026 वायदा अनुबंध में 2.14 डॉलर यानी 2.44 प्रतिशत की तेजी आई और यह 89.86 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर बातचीत में गतिरोध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने को लेकर अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई।स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इसके संचालन को लेकर बनी अनिश्चितता ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में आपूर्ति संबंधी चिंताओं को बढ़ाया है।अमेरिकी क्रूड वायदा भी बढ़कर 82.42 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। दोनों प्रमुख तेल अनुबंध 31 जुलाई के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गए। सोमवार को दोनों में करीब 5 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई थी।भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी कई मोर्चों पर दबाव पैदा कर सकती है। इससे आयात बिल बढ़ सकता है, रुपये पर दबाव आ सकता है और ईंधन तथा परिवहन लागत बढ़ने से महंगाई पर भी असर पड़ सकता है। इसके अलावा, कच्चे माल और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ने से कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है।महंगाई के आंकड़ों पर भी बाजार की नजरतेल की बढ़ती कीमतों के बीच अमेरिकी उपभोक्ता महंगाई के आंकड़े भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य रिपोर्ट बुधवार को जारी होने वाली है।अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि हेडलाइन उपभोक्ता कीमतों में महीने-दर-महीने 0.1 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है, जबकि कोर महंगाई 0.2 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है।यदि महंगाई अनुमान से अधिक रहती है, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों में बदलाव आ सकता है। फिलहाल बाजार में अगले महीने फेड द्वारा दरों में बदलाव को लेकर लगभग बराबर संभावनाएं देखी जा रही हैं।रुपया कमजोर, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरीविदेशी मुद्रा बाजार में भी रुपया कमजोर रहा। आंशिक रूप से परिवर्तनीय रुपया 95.4450 प्रति डॉलर के स्तर पर कारोबार करता रहा, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 95.3050 पर बंद हुआ था।कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच रुपये में कमजोरी भारत के लिए अतिरिक्त चुनौती बन सकती है। डॉलर के मुकाबले कमजोर रुपये से आयातित वस्तुओं की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर खासकर ऊर्जा आयात पर पड़ सकता है।भारतीय सरकारी बॉन्ड बाजार में भी यील्ड में बढ़ोतरी देखी गई। 10 वर्षीय बेंचमार्क सरकारी प्रतिभूति की यील्ड 0.43 प्रतिशत बढ़कर 6.795 प्रतिशत हो गई, जबकि पिछले सत्र में यह 6.766 प्रतिशत थी।कमोडिटी बाजार में एमसीएक्स गोल्ड के 5 अक्टूबर 2026 निपटान वाले वायदा अनुबंध में 0.50 प्रतिशत की तेजी आई और यह 1,53,869 रुपये पर पहुंच गया।अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 0.04 प्रतिशत बढ़कर 99.85 पर रहा, जबकि अमेरिका की 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 0.79 प्रतिशत बढ़कर 4.735 प्रतिशत हो गई।वैश्विक बाजारों में भी सतर्कतावैश्विक बाजारों में भी मंगलवार को मिलाजुला रुख देखने को मिला। अमेरिका-ईरान तनाव और ब्रिटेन के कमजोर खुदरा बिक्री आंकड़ों के कारण यूरोपीय बाजारों के अधिकांश प्रमुख सूचकांक दबाव में रहे।ब्रिटेन में जुलाई के दौरान कुल खुदरा बिक्री वृद्धि घटकर सालाना आधार पर 1.3 प्रतिशत रह गई, जबकि एक साल पहले यह 2.5 प्रतिशत और जून 2026 में 1.9 प्रतिशत थी। खाद्य बिक्री में 3.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि गैर-खाद्य बिक्री में 0.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।इसके विपरीत, अधिकांश एशियाई बाजार बढ़त के साथ बंद हुए। हालांकि, वैश्विक महंगाई के परिदृश्य को लेकर अनिश्चितता बनी रही।अमेरिकी बाजार में सोमवार को भी